धड़कने बैचैन है
क्या हसीं ख्वाब है
इश्क़ बेमिसाल है हुस्न लाज़वाब है❤️

 

जरूरत ही नहीं है किसी को ये बताने की कौन हैं हम
जो जानते हैं वो मानते हैं 🙂🙂

 

प्रेम में पुरुष मन्ज़िल का सोचता है और स्त्री सफ़र की…!!!!

 

जिस्म खिलौना रहा अक्सर हुस्न की बाजार में
अब ये दौड़ है कि रूह भी बक्शी नहीं जाती !!

😔😔😔

Spread the love

By Sanyasi

Leave a Reply

Your email address will not be published.