hamari adhuri kahani shayari

इतेफ़ाक है कि आज भी तेरा ⠀
इंतेज़ार है,⠀
तह कर चुका लंबा सफ़र मैं⠀
पर आज भी तेरी ही याद है,⠀

दिन ढले तो तू एक ख़्वाब है,⠀
उजाला हो तो बन जाती तू आब है,⠀
दिल में सुलगती सी एक आग है⠀
कि आज भी क्यूँ तू मुझे याद है?⠀

यक़ीन है निकलूँगा इस कश्मकश से मैं⠀
आख़िर तू एक ख़्वाब ही तो है,⠀
उकेरूँगा ये दास्ताँ अपने पन्नों में⠀
होने दूँगा इश्क़ ब्यान उन पलों में,⠀
रखूँगा इसे संजो कर अपनी किताब में,⠀

एक ख़्वाब जो बेहद क़रीब है⠀
क्यूँकि तू मुझे अज़ीज़ है,⠀
ले जाऊँगा तुम्हें “याद शहर” में⠀
सहर होते ही “सैर” पे निकलेंगे,⠀
दिन ढलेगा फिर एक ख़्वाब देखेंगे,⠀

मैं आब बन जाऊँ और तुम आग,⠀
वक़्त वक़्त पर मिलेंगे⠀
“हीर-राँझे” जैसे फ़ना होंगें,⠀
हाँ ये ख़्वाब पूरा होगा…

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By Sanyasi

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