ये आँखें वो बातें बयान कर गयी⠀
ज़ो ये अल्फ़ाज़ कह ना सके,⠀⠀
दिल में ख़लिश तो दोनों ओर से थी⠀⠀
पर कभी कुछ कह ना सके,⠀⠀
इंतेज़ार रह गया दोनों ओर से,⠀⠀
पर सब जानते हुए भी कभी कुछ कह ना सके,⠀⠀
⠀⠀
कह दिया इन ख़्वाबों में जो कहना था⠀⠀
हक़ीक़त में तो वो कह ना सके,⠀⠀
इंतेज़ार रह गया दोनों ओर से,⠀⠀
और ये ख़्वाब ⠀⠀
ख़्वाब ही रह गय,⠀⠀
⠀⠀
कह देते तो शायद ये “काश”⠀⠀
ना होता,⠀⠀
इस दिल को थोड़ा चैन तो होता,⠀⠀
पर डरता था ये दिल कि कहीं⠀⠀
टूट ना जाए ये रिश्ता,⠀⠀
तो बस इसी कारण वो कह ना सके,⠀⠀
⠀⠀
कुछ बातें अनकही सी रह गयी,⠀⠀
और कुछ यादें इस दिल की होकर रह गयी,⠀⠀
आज भी ज़िक्र है तुम्हारा इन पन्नों में,⠀⠀
कभी याद आती है तो इन पन्नों में लिखी ⠀⠀
कुछ कहानियों को पढ़ लेता हूँ,⠀⠀
⠀⠀
पर दिल में अब भी वो “काश” खलता है,⠀⠀
अगर कह दिया होता,⠀⠀
तो शायद इन पन्नों में लिखी कहानियाँ कुछ और होती…..⠀

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By Sanyasi

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