सब्र एक ऐसी सवारी है जो जो अपने सवार को कभी गिरने नहीं देती
,ना किसी के कदमो ,ना किसी के नजरो में.
दोस्तों हम जिन्दगी के भाग दौड़ में ऐसा खो जाते है की ,हम सोचते है कोई भी काम तुरंत हो जाये ,हम जानते है की सबको जल्दी हि करना है,लेकिन दोस्तों कभी कभी जल्दी करने के चक्कर में ,जिसे पाना चाहते है उसे ,हमेशा के लिए खो देते ,और जिन्दगी भर पछताते रहते है ,इसलिए दोस्तों जिन्दगी की सफर में निकले हो तो सब्र के ट्रेन में बैठो ताकि वो आपको आपके सही मंजिल तक पंहुचा दे ,और जाप जिन्दगी भर खुश रहे ,कहते है एक छोटी सी स्टोरी है समझ लीजिये ….संध्याकाल के बीतते ही जब आसमान में काली घटायें छाने लगती हैं. तब तारों के बीच आसमान में निकलने की प्रतिस्पर्धा होने लगती हैं. सभी को आसमान में प्रकट होने की जल्दी रहती हैं. जैसे – जैसे समय बीतता जाता हैं, उनमें आसमान में छा जाने की तीव्रता और अधिक तेजी से बढ्ने लगती हैं. और इस तरह ऐसे अनगिनत तारे आसमान में छा जाते हैं, लेकिन वो जितनी तेजी से आते हैं. उन पर उतना ध्यान केन्द्रित नही होता, वो आपसी होड़ में जल्दबाजी करने लग जाते हैं इसलिए हर एक पर किसी की नजर नहीं जाता और उनकी सुंदरता फीकी पड़ जाती हैं.
लेकिन,जब स्वाति नक्षत्र का आसमान में आगमन होता हैं, वो बड़ी धैर्यता से आसमान में फैलती हैं और इस कारण सभी स्वाति नक्षत्र की तरफ आकर्षित हो जाते हैं. और चेहरे पर मुस्कान के साथ हर कोई स्वाति नक्षत्र की आभा का वर्णन करता है, उसकी सुंदरता में खो जाता हैं.
प्रतिस्पर्धा में फँसे तारे केवल एक कौने में ही रह जाते हैं. और इस तरह से स्वाति नक्षत्र की प्रशंसा सुन सभी तारों में ईर्षा का भाव आ जाता हैं और वो अपनी व्यथा नारद मुनि से जाकर कहते हैं.
तब नारदजी उन्हें समझाते हैं कि संसार में उसी की ख्याति होती हैं जिनमे धैर्य होता हैं. प्रतिस्पर्धा आवश्यक हैं, पर जो अधिक उतावलापन दिखाते हैं. उन्हें लोग अक्सर ही उन्हें अनदेखा कर देते हैं. हमेशा कीमत सब्र की होती हैं, इसलिए कहते हैं. सब्र का फल मीठा होता हैं. नारद जी कहते हैं तुम सभी तारों में धैर्य नहीं हैं और स्वाति नक्षत्र में अपार धैर्य हैं, जिसके कारण उसकी ख्याति तुम से कई अधिक हैं. और वो अधिक सम्मान पाता हैं. और इस तरह सभी तारों को सब्र का फल मीठा होता हैं, यह बात समझ आ जाती हैं.
सामान्य जीवन में “सब्र का फल मीठा होता हैं” का उदाहरण :
सब्र का फल मीठा होता हैं, यह बात अक्सर मैंने महसूस की है. मैं हमेशा से अपने काम में आने वाली बढोत्तरी अथवा कमी से उतावली होकर खुश या दुखी हो जाती हूँ, जिस पर मुझे बाद में अहसास होता है कि सब्र का फल मीठा होता हैं. किसी भी कार्य को करने के बाद उसके परिणाम के लिए उतावलापन दिखाना ही उस कार्य के प्रति हमारा पहला गलत व्यवहार होता हैं. हमें हमेशा वक्त देना चाहिये और शांति से अवलोकन करना चाहिये. जल्दबाजी में समान्यतः निराशा ही हाथ आती हैं या कई बार हमसे बड़ी गलती भी हो जाती हैं.
धैर्य ही एक सफल बिज़नेस मेन होने की पहचान देता हैं. जिसमे धैर्य नही होता, उसे कामयाबी नहीं मिलती. धैर्य ही एक ऐसा गुण हैं, जो हर परिस्थिती में मनुष्य का दिमागी संतुलन बना सकता हैं. साथ ही विकट परिस्थती से बाहर निकाल सकता हैं, इसलिए सब्र का फल मीठा होता हैं. सब्र से ही व्यक्ति में लंबा चल पाने का भाव पैदा होता हैं और वो कठिन समय में भी अपना पूरा योगदान दे पाता हैं.
सब्र का फल मीठा होता हैं . तारो की इर्षा इस कहानी में इस मुहावरे का वर्णन आपके लिए किया हैं. ताकि आप इस अनमोल वाक्य को समझ सको और अपने जीवन में उतार सको. ऐसे ही ज्ञानवर्धन ब्लॉगस को पढ़ने के लिए आप इस पेज को सब्सक्राइब कर सकते हैं. …इसलिए दोस्तों हमेशा सब्र रखो.